Monday , October 26 2020

ਕੀ ਬਣੂ ਇਸ ਮੁਲਕ ਦਾ-ਰੋਜ ਰੋਜ ਦੀਆਂ ਇਹ ਘਟਨਾਵਾਂ ਇਨਸਾਨੀਅਤ ਤੋਂ ਯਕੀਨ ਉਠਾ ਰਹੀਆਂ !

ਇਹ ਘਟਨਾ ਗੁਜਰਾਤ ਦੇ ਰਾਜਕੋਟ ਦੀ ਹੈ ਜਿਥੇ 6 ਲੋਕ ਇੱਕ 11 ਸਾਲ ਦੀ ਬੱਚੀ ਨਾਲ ਪਿੱਛੇ ਅੱਠ-ਨੌਂ ਮਹੀਨਿਆਂ ਤੋਂ ਲਗਾਤਾਰ ਰੇਪ ਕਰ ਰਹੇ ਸਨ। ਜਿਸਦੀ ਮਾਂ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਘਰਾਂ ਚ ਕੰਮ ਕਰਕੇ ਗੁਜਾਰਾ ਕਰਦੀ ਹੈ। ਬੱਚੀ ਦਾ ਪਿਓ ਮਾਨਸਿਕ ਤੌਰ ਤੇ ਠੀਕ ਨਹੀਂ ਹੈ। ਇਹ ਘਟਨਾ ਇਸ ਮੁਲਕ ਦੀ ਦੁਰਗਤੀ ਨੂੰ ਦਰਸਾਉਂਦੀ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਸ਼ਰਮਸਾਰ ਕਰਨ ਵਾਲੀ ਗੱਲ ਹੈ।इस पूरी घटना को एक खबर की तरह पढ़ जाइए. क्योंकि ऐसे घिनौने अपराधों के लिए क्या लिखा जाए, क्या कहा जाए, ये हम समझ नहीं पा रहे. अपना गुस्सा, अपनी खीझ जाहिर कर पाने को हमारे पास कोई शब्द नहीं है. गुजरात का राजकोट शहर. 17 मार्च को 11 साल की एक बच्ची मां बन गई. उसने एक बच्ची को जन्म दिया. नवजात बच्ची जिंदा बचेगी कि नहीं, पता नहीं.बच्ची यूं पैदा हुई कि उसकी मां के साथ गैंगरेप हुआ. छह लोग पिछले आठ-नौ महीनों से उस 11 साल की बच्ची का सामूहिक बलात्कार कर रहे थे. बार-बार. कई बार. बच्ची प्रेग्नेंट हो गई.जन्मजात पैरालिसिस के साथ पैदा हुई है नवजात-इतनी छोटी उम्र की प्रेग्नेंसी. उस पर पौष्टिक खाने की कमी. साथ में अनुवांशिक परेशानियां. उसके पेट में जो बच्ची थी, उसका ठीक से विकास नहीं हो पाया. उसकी रीढ़ की हड्डी ठीक से विकसित नहीं हो पाई. बच्ची आठवें महीने में ही पैदा हो गई. जन्मजात पैरालिसिस के साथ. इतनी कमजोर कि उसका वजन डेढ़ किलो है बस. उसकी कंडीशन के लिए मेडिकल साइंस के पास एक शब्द है- स्पाइना बिफिडा. उसका बचना मुश्किल लग रहा है.बच भी गई, तो अनाथालय भेज दी जाएगी-डॉक्टर उसे बचाने की कोशिश कर रहे हैं. जांच कर रहे हैं कि बच्ची का ऑपरेशन किया जा सकता है या नहीं. अगर ऑपरेशन हो सका, तो शायद उसकी जान बच जाएगी. लेकिन उसकी जिंदगी आसान नहीं होगी. उसका शरीर पैरालाइज्ड रहेगा. और शायद आगे और भी परेशानियां हों उसे. इससे पहले फ्रांस से एक खबर आई थी. डॉक्टरों ने 20 हफ्ते के एक भ्रूण का ऑपरेशन किया था. उस भ्रूण को स्पाइना बिफिडा था. सर्जरी के बाद वो ठीक हो गया. लेकिन तब डॉक्टरों को उस भ्रूण की हालत वक्त रहते पता चल गई थी. यहां तो वो बात भी नहीं थी. बच्ची का परिवार इस नवजात बच्ची को नहीं रखना चाहता. गरीब लोग हैं. पिता की मानसिक स्थिति ठीक नहीं. मां घरों में बरतन धोती हैं. उन्हें लग रहा है कि पैदा हुई बच्ची को रखने से उनकी अपनी बेटी का जीवन बर्बाद हो जाएगा. यानी अगर डॉक्टरों ने नवजात को बचा भी लिया, तो भी उसे अपनी अपंगता के साथ अनाथालय में रहना होगा. वहां क्या भविष्य मिलेगा उसे?